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मेरे जज़्बात

  किसको बताऊं दिल की जाकर, मैं तो खुद से छिप कर बैठा हूं ।  दर्द, दुखांत, उदासियों को, मैं खुदमें लिफकर बैठा हूं । बस कलम से है बंधन मेरा, तभी बेयान यह लिख कर बैठा हूं ।  किसको बताऊं दिल की जाकर, मैं तो खुद से छिप कर बैठा हूं ।  मेरी जिंदगी की क्या बात करूँ, यह हशर है हसीन नहीं ।  आए है बड़े शिकवे इसमें , यह बेरंग है रंगीन नहीं ।  यह सावन की बरसातों में, मैं किसकी दीद कर बैठा हूं ।  किसको बताऊं दिल की जाकर, मैं तो खुद से छिप कर बैठा हूं  कवि द्वारा सन्देश: इस कविता में मैने उस जज़्बात की बात की है जो हर एक इंसान मै छुपा होता है और जो वह किसी से कह नहीं पाता।

Wapas Aaoge mere Sheher

She:- Waapas Aaoge iss sheher......???? Me:- " Waada nahi kar Sakta." She:- Shayad he Kehdo....?? Me:- "Usme bhi Umeed hai na." She:- "Jhoothi Ummid , Sach se behtar lagti hai." Me:- "Shayad Aaunga." She:- "Agar Aa gye toh Mujhse Miloge. "?? Me:- "Tum milogi Mujhse....." ????? She:- "Mujhe to Milna hi hoga na, Phir Wahi puchne ke liye."    Me:- "Kya.....??????" She:- Waapas Aaoge iss sheher..........????????????                                                                                                      ~Wasim Akram

पर कोई होता जो गलतियों पर डाटने वाला

  सब कुछ है, मां सब कुछ जिस आज़ादी के लिए तुझसे मैं सारी उम्र लड़ता रहा........ वो सारी आज़ादी मेरे पास है, फिर भी न जाने क्यों दिल की हर धड़कन उदास ☹☹🥲 है, कहता था न तुझे , मैं वही करूंगा जो मेरे जी में आएगा, और आज मैं वही सब कुछ करता हूं, जो मेरे जी में आता है, बात ये नहीं है मुझे कोई रोकने वाला नहीं है, बात है तो इतनी सी सुबह देर से ऊठू न, तो कोई टोकने वाला नहीं है । सुबह देर से ऊठू न, कोई टोकने वाला नहीं है। रात को लेट लौटू तो कौन टोकेगा भला, दोस्तो के साथ घूमने पर उल्ल्हन्ने कौन देगा , मेरे वो तमाम झूठे बहाने कौन देगा , कौन कहेगा की इस उमर में क्यों परेशान करता है, हाय ये लड़का क्यों नहीं सुधरता है, पैसे कहा खर्च हो जाते है तेरे, क्यों नहीं बताता है सारा सारा दिन मुझे सताता है, रात को देर से आता है खाना गर्म करने को जागती रहूं, खिलाने को तेरे पीछे भागती रहूं , बहाती रहूं आंसु तेरे लिए। कभी कुछ सोचा है , मेरे लिए ...................खैर मेरा तो क्या होना है क्या हुआ है, तू खुश रह लेना यही दुआ है, और आज तमाम खुशियां ही खुशियां गम ये नहीं है , कोई ये सब खुशियां बताने वाला होत...

घर का जिम्मेदार बड़ा बेटा हुं मैं

अपने घर का जवान बेटा हूं, और मोहब्बत में टूट चुका हु। कांधे पे जिम्मेदारियों का बोझ है, और अंदर से हार चुका हूं, सच कहूं तो मर जाना चाहता हूं, हर जगह से बिखर चुका हु मैं, मां बाप का बहुत उम्मीद है मुझमें, घर का जिम्मेदार बड़ा बेटा हुं मैं, कैसे बताऊं कितनी अजीयत में हु, अंदर से घुट घुट कर मर रहा हु मै, मेरे आंखों में अंशुओ के सिवा कुछ भी नही है, सच कहूं तो बर्बाद हु मैं, मां बाप का सपना पूरा करके दुनिया को अलविदा कहना चाहता हूं मैं।।।                                                                                                              वसीम

I became quiet!

  “I became quiet! I used to think you got to express whatever you feel, but when life hits you hard, you go into your tranquility mode. You stop telling people, build huge walls all around you, start hiding your true sentiments, and become heartless. In the end, you become numb. It's just a continuous cycle of your chord towards deeds of people that have become a reason for your woe. First things bother you & aftermath situations stop bugging you. The "I'm used to it" phase comes, in which how much erroneous occurs you just take this as a normal event. You don't realize but you become so weak that you don't care about yourself. You just quit your life & become quiet.”

सुनो ना मेरी एक बात का जवाब दो ना

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  सुनो ना मेरी एक बात का जवाब दो ना, अगर मै तुम्हारी राह! देखते देखते मर जाऊं, तो मेरी जनाजा पे तो आओगे ना।, मुझे एक बार देखने तो आओगे ना, सब जल्दी में रहेंगे मुझे दफनाने के लिए , इंतजार नहीं करेगा कोई मेरी तरह ! तुम वक्त पे आओगे ना। मुझे आखरी बार तुम सीने से लगाओगे न।, अगर कोई पूछे तुमसे की क्या रिश्ता था हमारा , तो उन्हें तुम मुझे अपनी मोहब्बत बताओगे न।, तुम मेरे माथे को आखरी बार प्यार से चूमोगे ना, सब मुझे कब्रिस्तान ले जाने के लिए जल्दी में रहेंगे।, तुम उन्हे थोड़ी और रूक जाइए कह कर रोकोगे ना, तुम मुझे आखरी बार प्यार से निहारोगे ना, सब रो रहे होंगे , मुझे उठने की भी कोशिश भी करेंगे। तुम मुस्कुरा कर आखरी बार अलविदा तो कहोगे ना, मेरी सारी गलतियां को तुम माफ कर दोगे ना , मैं कितना अच्छा था , ये सब एक दूसरे से कह रहे होंगे तुम अल्लाह से मेरी माफेरत की दुआ करोगे ना, मेरी आखरी सफर में तुम मेरे साथ रहोगे ना, कौन हूं , मैं तुम्हारा ये पहचान सबसे छुपाया तुमने, आखरी वक्त में मेरी पहचान तो सब से करोगे ना,                         ...

पिता जी

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 लड़के पिता को गले नहीं लगाते हैं,  लड़के ना पिता के गाल चूमते ना पिता के गोद में सर रख कर सकूँन से सोते है,  पिता और पुत्र का संबंध मर्यादा होते है,  बाहर जाने वाले लड़का अकसर घर फोन करता है, तो उनकी बात माँ से होती है,  पीछे से कुछ दबे- दबे शब्दो मे पिता जी भी कुछ कहते है, सवाल करते है या सलाह देते है,  जब कुछ नही होता कहने को तो  खांसने की हल्की आवाज़ सुनना मौजूदगी दर्ज करवाने के लिए काफी होती है,  पिता की आस्थिर होती तब्यत का हाल भी माँ से पूछते है और दवाइयों की सलाह, परहेज इत्यादि सब माँ के द्वारा पिता तक पहुचाते।  जैसे बचपन मे चोट लगने पे माँ से लिपट कर रोते थे, वैसा ही युवा अवस्था में लगे ठोकरों के करन अपने पिता से लिपट कर रोना चाहते है लड़को और अपने पिता के चिंताए आपस मे साझा करना चाहते हैं,  पर ऐसा हो नही सकता है, पिता और पुत्र सुरुवात से ही एक दुरी में रहते है, दूरी अदव की लिहाज़ की संस्कार की,  हर बेटे का मन करता है, इन दूरियों को लंगते हुए जाए और अपने पिता को कहे  I love you 😒😒     ...