बचपन के वो दिन बड़े होने पर कभी भी वापस नहीं आते, ना वह सुकून नावा मस्ती ना ही वह हंसी!

 हमारा बचपन जितनी खट्टी मीठी यादों से भरा है ! हमारा बड़ा होना इतनी ही बुरी यादों और दुखों से भरा है ,हम सब का बचपन बहुत ही प्यारा बहुत ही सुख में और बहुत ही सुकून भरा होता है ,बचपन में वह मां की ममता, मां का प्यार पिता की डांट में भी प्यार ,जब हम बच्चे रहते हैं तो अक्सर हमारे अंदर बड़ो को देखकर यह लगता है कि हम भी बड़े होते तो हम ऐसा करते वैसा करते हमारा भी रुतबा धौंस जमाते! बड़े लोग छोट को मार देते हैं छोटे कुछ नहीं कर पाते! तुम्हारे अंदर अक्सर यह बात होती है कि हम भी बड़े होत तो कितना अच्छा होता !जैसे जैसे हम बड़े होते हैं कठिनाइयां भी हमारे पास आने लगती हैं, और इतना ही हमारा बड़ा होना दुखों से भर जाता है तब हमें सिर्फ एक बात याद आती है कि अगर हमारे मां-बाप हमारे पास ना  होते तो हमारा क्या होता!



 कभी-कभी ऐसी परिस्थिति बन जाते हैं जीवन में कि हम खुद को संभाल नहीं पाते हैं पर हमारे मां बाप की हिम्मत और उनका साथ रहता है इसलिए हम खुद को संभाल पाते हैं ! अगर भगवान ने मांं बाप न बनाए होते तो हमारा जीवन कैसा होता ! उन्हें देखिए उन्हें सोचिए कि जिनके मां बाप नहीं है जो लावारिस है जो सड़क पर अपनी दिन रात गुजारते हैं!
 वह कैसे जिंदगी जी रहे हैं कहीं ना कहीं हमारा जीवन बहुत बेहतर है ,हम सिर्फ एक बात की चिंता करते हैं कि हमें नौकरी चाहिए नौकरी नहीं मिल रही है इसी बात से हम डिप्रेस्ड रहते हैं ,लेकिन वह गरीब तो सड़कों पर रातों को सोते हैं उन्हें कौन सुबह उठाने वाला कौन बेटा कहने वाला  इतनी ठंड में कौन कंबल  उड़ाने वाला? हमारे मां-बाप हमारे पूज्य हैं ,हमारे ईश्वर, हमें उस रब का शुक्रिया करना चाहिए ,जिसने हमें हमारे मां-बाप की छाया दी!
मां- पापा

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