अजी कौन कहता है जनाब हम लड़कों की जिंदगी में कोई गम नहीं होता



 की बेटियां नसीब से तो बेटे दुआओं के बाद आते हैं.

अजी हम लड़के हैं जनाब कुछ जिम्मेदारियों के साथ आते हैं.

आधी उम्र जिम्मेदारियां समझने में गुजर जाती है. 
तो आधी उसे निभाने में
.
पूरा बचपन किताबों में गुजरता है.
तो जिंदगी कमाने में.

यह जिम्मेदारियां उम्र के साथ बढ़ती हैं यह बुढ़ापे में भी कम नहीं होता.

( अजी कौन कहता है जनाब हम लड़कों की जिंदगी में कोई गम नहीं होता)

कभी बेटा बनकर तो कभी बाप का फर्ज निभाना पड़ता है.
कभी खाने के लिए नखरे होते हैं तो कभी खाली पेट भी चलाना पड़ता है.

कभी मां की गोद में सोते हैं तो कभी जिम्मेदारियों के बोझ में.
कभी नौकरी की तलाश में रहते हैं तो कभी सुकून की खोज में.

हम हर किसी की तकलीफ है समझते हैं मगर अपनी तकलीफों का किसी से जिक्र नहीं करते.
जिम्मेदारियों के पीछे हम इस कदर भागते हैं कि अपनी ख्वाहिशों की भी फिक्र नहीं करते.

हमसे हर किसी को उम्मीद हैं मगर कोई हमारी ख्वाहिश से पूछे किसी का मन नहीं होता.

( अजी कौन कहता है जनाब हम लड़कों की जिंदगी में कोई गम नहीं होता)

दिल टूट जाए हमारा फिर भी मुस्कुराना पड़ता है चुप कर रोते हैं सब से आंसू छुपाना पड़ता है.

जिम्मेदारियों के पीछे हमारा इश्क भी मुकम्मल नहीं होता .
  घुट-घुट कर जीते हैं हंसने मुस्कुराने का भी दिल नहीं होता.

जिम्मेदारियां निभाते निभाते हमारे खुद के कोई अरमान नहीं बचते.
हम हर किसी का घाव भरते हैं मगर हमारा कोई मरहम नहीं होता.

( अजी कौन कहता है जनाब हम लड़कों की जिंदगी में कोई गम नहीं होता)

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