बस तेरी याद ही तो जो हर वक्त आती है।

बस एक तेरी याद ही तो है जो हर वक्त आती है मुझे,
तेरी याद ही तो हर वक्त रुलाती है मुझे,
वक्त बेवक्त बस तू ही तो नज़र आती है मुझे,
इतना टूट कर चाहा है तुझे, फिर भी तू मुझे,
इस कदर गुरुर कर इठलाती, झकझोरती है मुझे,
तुझे पाने की हर मुमकिन कोशिश की है मगर,
ऐ मेरी मंज़िल , ऐसी क्या खता है मेरी जो,
तू पास आकर भी, इतनी दूर नज़र आती हैं मुझे।।


                                                                   ~वसीम अकरम
                                                           सपने:- अंतरिक्ष इंजिनीयरिंग

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

Wapas Aaoge mere Sheher

पिता जी

पर कोई होता जो गलतियों पर डाटने वाला