उस रिश्ते को नाम भले ही मोहब्बत का ना मिला,
पर रिश्ता था दिल का,
वो साथ बैठ वक्त गुजारना,
वो साथ हंसना
, वो साथ रोना
,
एक दूसरे की आखों में खो जाना,
खामोशियों को सुनना,
वक्त पाते ही हाथ थाम लेना,
जिंदगी से बन गए थे वो,
हर सुबह का पहला ख्याल और
हर रात की आखिरी याद बन गए थे वो,
एक खुशी महसूस होती थी उनकी तारीफ़ से,
पर ना जाने क्यों सब बिखर गया,
सब तबाह हो गया
कुछ गलतफ़हमी जिम्मेदार रही,
कुछ हालातों का हाथ था और कुछ हमारा,
पर अब वो जिंदगी में पास नहीं,
यादों में ख़ास रहते है,
कुछ तानों में,
कुछ स्थानों में,
कुछ कहानियों में,
कुछ message में,
कुछ gaano में,
और मेरे दिल के अधूरे अरमानों में
!
ना उनकी कोई गलती थी,
ना मैं गलत हूं,
पर अब ना वो दिल रहा ना मैं,
जो दिल के रिश्ते निभा सके,
ऐसा नहीं है कि अब उनकी कोई चाह नहीं है,
पर उनकी चाहते पूरी करने की अब मेरे पास कोई राह नहीं हैं,
Comments
Post a Comment